Read in English: Marriage Isn’t Dying: The Silent Revolution Behind Why People Are Rethinking Marriage
“तुम्हारी उम्र कितनी हो गई है?”
“अभी तक शादी नहीं की?”
“कोई पसंद नहीं आई?”
…
शायद 28, 30 या 35 की उम्र पार करते हुए आपने भी इनमें से कोई सवाल सुना हो।
किसी ने मज़ाक में पूछा होगा।
किसी ने चिंता में।
और किसी ने शायद ऐसे पूछा होगा जैसे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण काम अब तक अधूरा पड़ा हो।
लेकिन एक बात पर शायद ही कभी चर्चा होती है—
क्या हर व्यक्ति को केवल इसलिए शादी कर लेनी चाहिए क्योंकि समाज को लगता है कि अब उसकी शादी हो जानी चाहिए?
यहीं से कहानी बदलती है।
आज दुनिया के कई हिस्सों में लोग पहले की तुलना में देर से शादी कर रहे हैं। अमेरिका में भी युवा लोग पिछली पीढ़ियों की तुलना में बाद में विवाह और परिवार से जुड़े महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल कर रहे हैं। प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार, 2023 में अमेरिका में 25–29 वर्ष की आयु के 29% लोग विवाहित थे, जबकि 1993 में यह अनुपात 50% था। 30–34 वर्ष की आयु में भी यह अनुपात 1993 के 63% से घटकर 2023 में 51% रह गया।
लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि लोगों ने विवाह को ठुकरा दिया है?
जरूरी नहीं।
2025 में प्यू रिसर्च सेंटर के एक अमेरिकी सर्वेक्षण में 18–49 वर्ष के ऐसे गैर-एलजीबीटीक्यू अमेरिकी वयस्क, जिन्होंने कभी विवाह नहीं किया था, उनमें 63% ने कहा कि वे भविष्य में कभी न कभी शादी करना चाहते हैं। वहीं 12% ने कहा कि वे शादी नहीं करना चाहते, जबकि 25% इस बारे में निश्चित नहीं थे।
तो फिर असली कहानी क्या है?
शायद इंसान प्रेम से दूर नहीं हुआ।
शायद वह परिवार से भी दूर नहीं हुआ।
शायद वह केवल यह कहने लगा है—
“मैं जीवनभर का रिश्ता केवल इसलिए नहीं बनाऊँगा क्योंकि अब मेरी उम्र हो गई है।”
आज बहुत-से लोग पहले अपने करियर को व्यवस्थित करना चाहते हैं।
कुछ आर्थिक रूप से स्थिर होना चाहते हैं।
कुछ सही साथी मिलने का इंतज़ार करते हैं।
कुछ पिछले रिश्तों के अनुभव से सावधान हो जाते हैं।
और कुछ लोग यह भी स्वीकार करते हैं कि वे विवाह के बिना भी संतुष्ट जीवन जी सकते हैं।
इसलिए हमें एक महत्वपूर्ण अंतर समझना होगा—
देर से शादी करना और शादी को अस्वीकार करना एक ही बात नहीं है।
और शायद यही इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है।
क्योंकि सवाल यह नहीं होना चाहिए—
“लोग शादी क्यों नहीं कर रहे?”
शायद सही सवाल यह है—
“लोग अब शादी करने से पहले इतना सोच क्यों रहे हैं?”
क्या यह डर है?
क्या यह स्वार्थ है?
क्या यह बदलती सामाजिक व्यवस्था है?
या फिर…
क्या यह पहले से अधिक जागरूक होकर जीवनसाथी चुनने की कोशिश है?
इस लेख में हम किसी एक पक्ष को सही साबित करने की कोशिश नहीं करेंगे।
न हम यह कहेंगे कि हर व्यक्ति को शादी करनी चाहिए।
न हम यह कहेंगे कि शादी की कोई जरूरत नहीं है।
हम भारत और अमेरिका सहित अलग-अलग समाजों में बदलती सोच, विवाह की उम्र, परिवार, स्वतंत्रता, आर्थिक परिस्थितियों और रिश्तों के मनोविज्ञान को समझने की कोशिश करेंगे।
हम यह भी देखेंगे कि महिलाओं और पुरुषों की सोच में क्या बदलाव आया है, और बुद्ध, ओशो तथा भगवद्गीता जैसे अलग-अलग दार्शनिक दृष्टिकोण विवाह को किस तरह देखते हैं।
क्योंकि शायद…
विवाह समाप्त नहीं हो रहा है।
लोग हाँ कहने से पहले बेहतर सवाल पूछ रहे हैं।
और शायद यही आधुनिक समाज की सबसे शांत…
लेकिन सबसे गहरी क्रांति है।
लेकिन इस सोच के पीछे की असली वजह क्या है? क्या यह सिर्फ एक फैसला है, या हमारे आस-पास बदलते समाज, अर्थशास्त्र और प्राथमिकताओं का एक गहरा चक्रव्यूह?
इस बदलाव की असली परतों को खोलेंगे श्रृंखला के अगले भाग में…
लेखक की टिप्पणी
यह लेख विवाह के पक्ष या विपक्ष में कोई निर्णय देने के बजाय बदलती सामाजिक सोच को समझने का एक प्रयास है। हमारा उद्देश्य अलग-अलग दृष्टिकोणों, उपलब्ध शोध और वास्तविक सामाजिक परिस्थितियों को सामने रखकर पाठक को स्वयं सोचने का अवसर देना है।
आपकी राय क्या है?
क्या देर से विवाह करना बदलती सोच का संकेत है या बदलती प्राथमिकताओं का? क्या आज के लोग विवाह को पहले की तुलना में अधिक सोच-समझकर चुन रहे हैं? अपनी राय टिप्पणी में साझा करें।
अस्वीकरण
यह लेख किसी व्यक्ति को विवाह करने या न करने की सलाह नहीं देता। इसमें प्रस्तुत विचार और विश्लेषण केवल सामाजिक बदलाव, उपलब्ध शोध और विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने के उद्देश्य से हैं। लेख में दिए गए आँकड़े संबंधित स्रोतों पर आधारित हैं और समय के साथ इनमें बदलाव हो सकता है। विवाह से जुड़े व्यक्तिगत निर्णय व्यक्ति की परिस्थितियों, प्राथमिकताओं और आपसी समझ पर निर्भर करते हैं।
स्रोत
लेख में प्रस्तुत आँकड़े प्यू रिसर्च सेंटर के संबंधित शोध और सर्वेक्षणों पर आधारित हैं। जहाँ आवश्यक हो, मूल स्रोतों का संदर्भ दिया गया है।

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