मानव जीवन एक ऐसी अनमोल यात्रा है, जिस पर किसी भी इंसान का कोई वश नहीं है। इस यात्रा की शुरुआत जन्म से होती है और इसका अंत मृत्यु पर होता है। इसके बीच का जो पूरा भाग प्रकृति ने हमें उपहार में दिया है, वह बस एक खूबसूरत फिल्म की तरह है।
भगवान ने इंसान को इस धरती पर हर वह जरूरी चीज प्रदान की है, जो उसके जीवन को सरल, सुगम और खुशहाल बना सके। लेकिन विडंबना यह है कि मानव अपने ही भीतर छिपे लोभ, मोह-माया और ईर्ष्या के जाल में लगातार फंसता चला जाता है। वह बाहरी चकाचौंध में अंधा होकर जीवन के असली आनंद को भूल जाता है।
जो व्यक्ति इन विकारों को जीत लेता है और खुद को मानसिक रूप से साध लेता है, वही इस जीवन का वास्तविक मूल्य समझ पाता है। ऐसा जागृत इंसान अंततः इस सुंदर प्रकृति का होकर असीम शांति को प्राप्त कर लेता है।
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